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राज्य

अस्पताल की शर्मनाक करतूत: महिला का पेट चीरा पर ऑपरेशन नहीं किया, सिलने के बाद रेफर; दून में तीन बच्चियों को जन्म देकर महिला की मौत

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ऋषिकेश/देहरादून, 10 सितंबर 2025 – उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दो गंभीर घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्होंने प्रशासन और आमजन में आक्रोश पैदा कर दिया है। एक तरफ ऋषिकेश के एक निजी अस्पताल पर महिला का पेट चीरकर ऑपरेशन न करने और सिलाई कर उसे दूसरे अस्पताल में रेफर करने का आरोप लगा है, वहीं दूसरी तरफ देहरादून के एक अस्पताल में तीन बच्चियों को जन्म देने के बाद एक महिला की मौत हो गई।


ऋषिकेश अस्पताल की घिनौनी करतूत

ऋषिकेश में स्थित एक निजी अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब जानकारी मिली कि एक महिला का पेट चीरा गया, लेकिन ऑपरेशन नहीं किया गया। आरोप है कि ऑपरेशन के बजाय पेट को सिल दिया गया और महिला को दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद शहर में आक्रोश फैल गया और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि विभिन्न माध्यमों से जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन को बुलाकर बयान दर्ज किए गए हैं। दस्तावेज तलब कर जांच शुरू कर दी गई है। डॉ. शर्मा ने कहा, “प्रारंभिक जानकारी से यह स्पष्ट हुआ है कि महिला का ऑपरेशन होना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आगे की जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”


दून में तीन बच्चियों को जन्म देकर महिला की मौत

इसी बीच देहरादून के एक निजी अस्पताल में भी एक दुखद घटना घटी। टिहरी जिले के प्रतापनगर की एक महिला ने तीन जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया, लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते चार सितंबर को उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, महिला को सिजेरियन डिलीवरी के बाद आईसीयू में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार जारी रहा, लेकिन स्थिति बिगड़ती गई और महिला को बचाया नहीं जा सका।

सीएमआई अस्पताल के मैनेजर बी.सी. डिमरी ने बताया, “36 वर्षीय महिला को दो सितंबर को भर्ती किया गया था। उसके स्वास्थ्य में कई जटिलताएँ थीं। इलाज के बावजूद चार सितंबर को उसकी मौत हो गई। परिजन उसी रात तीनों बच्चियों को लेकर चले गए। बच्चों की देखरेख परिजन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ गलत पोस्ट वायरल हो रही हैं।”


सोशल मीडिया पर गोद देने की अफवाहें

महिला की मौत के बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हुआ कि परिवार बच्चियों को गोद देना चाहता है। कई लोग अस्पताल पहुँच गए और मदद की पेशकश की। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि परिजनों ने ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की है और वे बच्चियों की परवरिश स्वयं कर रहे हैं। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने अस्पताल जाकर आवश्यक जानकारी संकलित कर ली है।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

इन दोनों घटनाओं ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, वहीं आमजन ने अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

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