Shopping cart

Subtotal: $4398.00

View cart Checkout

मध्य प्रदेश

मिड-डे मील में बच्चों को खीर-पूड़ी की जगह परोसे गए सेव-परमल, वीडियो वायरल, प्रशासन की लापरवाही उजागर

Blog Image
903

मध्यप्रदेश | 

सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषण और पढ़ाई में रुचि बढ़ाने के लिए मिड-डे मील योजना चलाई जा रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मध्यप्रदेश के एक सरकारी स्कूल से आई तस्वीरों ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। यहां बच्चों को खीर और पूड़ी की जगह सेव और परमल (चिवड़ा) परोसा गया। यह सब एक वायरल वीडियो के जरिए सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया।


वीडियो में क्या दिखा?

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के दौरान बच्चों को थालियों में सेव और परमल परोसे गए हैं। जबकि निर्धारित मेन्यू में उस दिन खीर और पूड़ी होना चाहिए था।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जब इसका विरोध किया तो स्कूल प्रबंधन ने मामले को टालने की कोशिश की। पर जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब प्रशासन हरकत में आया।


अभिभावकों का फूटा गुस्सा

अभिभावकों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है, मिड-डे मील में अक्सर मनमानी की जाती है, कभी क्वालिटी खराब होती है तो कभी खाना ही नहीं मिलता। बच्चों के हक के साथ किया गया यह खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।


प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

वीडियो के वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तुरंत स्कूल का निरीक्षण किया। ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कहा,

“मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित कर दी गई है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”


क्या कहता है मिड-डे मील गाइडलाइन?

भारत सरकार द्वारा तय किए गए मिड-डे मील गाइडलाइंस के अनुसार, बच्चों को हर दिन संतुलित और पौष्टिक भोजन मिलना अनिवार्य है। मेन्यू में बदलाव बिना उच्च अनुमति के नहीं किया जा सकता।


निष्कर्ष

मिड-डे मील जैसे संवेदनशील विषय पर घोर लापरवाही न केवल बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है, बल्कि सरकार की जन-कल्याण योजनाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। यह घटना पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने का मौका है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post